‘धाकड़’ निर्णय : उत्तराखंड में 1 जुलाई (आज) से मदरसा शिक्षा बोर्ड अधिनियम एवं गैर-सरकारी अरबी-फारसी मदरसा मान्यता नियम समाप्त … उत्तराखण्ड अल्पसंख्यक शिक्षा अधिनियम लागू

मुख्यमंत्री धामी ने कहा

  • हमारा संकल्प स्पष्ट है कि प्रदेश का नौनिहाल आधुनिक शिक्षा, विज्ञान, प्रौद्योगिकी, कौशल और भारतीय जीवन मूल्यों से सशक्त होकर विकसित उत्तराखंड एवं विकसित भारत के निर्माण में अपनी सार्थक भूमिका निभाए

उत्तराखंड सरोकार ब्यूरो 

देहरादून। उत्तराखंड सरकार ने सभी धर्मों के बच्चों को आधुनिक शिक्षा, विज्ञान, प्रौद्योगिकी, कौशल शिक्षा देने के उद्देश्य से 1 जुलाई यानी आज से मदरसा शिक्षा बोर्ड अधिनियम एवं गैर-सरकारी अरबी-फारसी मदरसा मान्यता नियम समाप्त कर दिया है। राज्य में आज से “उत्तराखण्ड अल्पसंख्यक शिक्षा अधिनियम” प्रभावी हो गया है। इससे यहां पढ़ने वाले बच्चे भारतीय जीवन मूल्यों से सशक्त होकर विकसित उत्तराखंड एवं विकसित भारत के निर्माण में अपनी सार्थक भूमिका निभाएंगे।

इस संबंध में मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने सोशल मीडिया पर लिखा है…

प्रिय प्रदेशवासियों,

आज से “उत्तराखण्ड अल्पसंख्यक शिक्षा अधिनियम” प्रभावी हो गया है। इसके साथ ही मदरसा शिक्षा बोर्ड अधिनियम एवं गैर-सरकारी अरबी-फारसी मदरसा मान्यता नियम समाप्त हो गए हैं।

मुख्यमंत्री ने लिखा है… आदरणीय प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी जी के मार्गदर्शन में हमारी सरकार प्रदेश में ऐसी शिक्षा व्यवस्था के लिए प्रतिबद्ध है जो आधुनिक, पारदर्शी, गुणवत्तापूर्ण, जवाबदेह और राष्ट्र निर्माण के मूल्यों पर आधारित हो। नई व्यवस्था सभी अल्पसंख्यक शिक्षण संस्थानों के लिए समान एवं पारदर्शी मान्यता प्रणाली सुनिश्चित करेगी।

मुख्यमंत्री ने कहा है हमारा संकल्प स्पष्ट है कि प्रदेश का नौनिहाल आधुनिक शिक्षा, विज्ञान, प्रौद्योगिकी, कौशल और भारतीय जीवन मूल्यों से सशक्त होकर विकसित उत्तराखंड एवं विकसित भारत के निर्माण में अपनी सार्थक भूमिका निभाए। इसी लक्ष्य के साथ हम निरंतर आगे बढ़ रहे हैं।

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